क्या सुक्खू सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ गंभीर है?
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Created on Thursday, 29 January 2026 13:10
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Written by Shail Samachar
हरोली काण्ड से उठे सवाल
शिमला/शैल। क्या सुक्खू सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सही में गंभीर है? क्या हिमाचल में कोई भी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ कारवाई कर पायी है? यह सवाल इसलिये प्रसांगिक हो जाते हैं क्योंकि इन दिनों ऊना के हरोली में घटा भूमि घोटाला विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है। इस घोटाले पर नेता प्रतिपक्ष पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी राजनीतिक सवाल उठाये हैं। यह सही है कि कोई भी सरकार भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण देने से बचती है। बल्कि भ्रष्टाचार कतई सहन नहीं किया जाएगा इसको लेकर ऊंचे से ऊंचे स्वर में घोषणाएं करने को श्रेय लेने का प्रयास करती है। इसी प्रयास में 31 अक्तूबर 1997 को हिमाचल सरकार ने एक रिवार्ड स्कीम अधिसूचित की थी। इस स्कीम के अनुसार भ्रष्टाचार के खिलाफ आयी हर शिकायत की एक माह के भीतर प्रारंभिक जांच करके यदि शिकायत में दम हुआ तो इसकी नियमित जांच करके शिकायतकर्ता को एक लाख का इनाम देने का प्रावधान किया गया था। इस स्कीम के अधिसूचित होने के बाद इसके तहत दर्जनों शिकायतें आयी लेकिन एक भी शिकायत की नियमानुसार जांच नहीं हुई। बल्कि प्रदेश उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी कोई कारवाई नहीं हुई है। यहां तक की सर्वाेच्च न्यायालय के फैसलों तक पर कोई अमल नहीं हुआ है। हिमाचल के भू-राजस्व अधिनियम की धारा 118 के तहत कोई भी गैर हिमाचली गैर कृषक सरकार की पूर्व अनुमति के बिना प्रदेश में जमीन नहीं खरीद सकता। लेकिन प्रदेश में सबसे अधिक इसी प्रावधान का दुरुपयोग हुआ है। शान्ता सरकार से लेकर आज तक हर सरकार पर हिमाचल ऑन सेल के आरोप लगे हैं। इसकी जांच के लिये प्रदेश में चार बार जांच आयोग गठित हो चुके हैं। हजारों पन्नों की रिपोर्ट सरकार के पास मौजूद है। लेकिन आज तक किसी भी जांच रिपोर्ट पर कोई निर्णायक कारवाई नहीं हो पायी है। विधानसभा में धारा 118 के तहत दी गयी अनुमतियों की सूचियां तक आयी है। अधिकांश नौकरशाहों ने एक से अधिक बार यह अनुमतियां हासिल की हैं। परन्तु आज तक सरकार यह प्रावधान नहीं कर पायी है कि मकान बनाने के नाम पर एक से अधिक बार अनुमति नहीं मिल सकती है। एक समय तक विपक्ष हर सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार को लेकर महामहिम राज्यपाल को आरोप पत्र सौंपता आया है। लेकिन एक बार भी कोई भी सरकार अपने ही आरोप पत्र पर सत्ता में आने पर कारवाई नहीं कर पायी है। कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान सार्वजनिक रूप से एक आरोप पत्र सौंपा था। जिस पर कारवाई नहीं हो पायी है क्योंकि जयराम ठाकुर ने भी अपनी सरकार आने पर कांग्रेस सरकार के खिलाफ किसी आरोप पत्र पर कारवाई नहीं की है। इसलिये भ्रष्टाचार के खिलाफ ऊंचे स्वर में बोलने का अर्थ जांच करना नहीं रहा है। जांच केवल व्यक्तिगत स्कोर सैटल करने तक ही सीमित रहती है। इस परिप्रेक्ष में यह उम्मीद करना की हरोली का जमीन खरीद घोटाला कोई परिणाम लायेगा भी बेमानी होगा। क्योंकि राजा नादौन की एक लाख कनाल से ज्यादा जमीन लैण्ड सीलिंग एक्ट के तहत सरकार में निहित हो जाने के बाद कैसे प्राइवेट लोगों में बिक गई इसकी आज तक कोई भी जांच क्यों नहीं हो पा रही है? राजा नादौन सीलिंग के बाद केवल 316 कनाल का मालिक रह गया था फिर उसके नाम पर लाखों कनाल जमीन कैसे बिक गई? क्या यह एक बड़ा घोटाला नहीं है। हरोली का जमीन घोटाला 1 अप्रैल 2012 से 31 मार्च 2023 तक घटा कहा जा रहा है। जिसमें हाउसिंग बोर्ड ने 600 कनाल जमीन आवास बनाने के नाम पर खरीदी। आरोप है की खरीदी गई जमीन आवास योग्य नहीं थी। 2012 में चुनावी वर्ष था और 4 नवम्बर 2012 को विधानसभा चुनाव हुये थे और कांग्रेस की सरकार आयी थी। कांग्रेस आने से छः माह पहले तक भाजपा की सरकार थी स्वभाविक है की जमीन चिन्हित करने की सारी कारवाई तो इसी सरकार के दौरान शुरू हो गई थी। फिर 2017 नवम्बर में पुनः नयी जयराम सरकार आ गयी। इस सरकार में भी इस पर कोई सवाल नहीं उठे। क्या जयराम सरकार के दौरान अधिकारियों ने इस प्राजैक्ट पर कोई काम नहीं किया? क्या उस दौरान सब कुछ ठीक था। दिसम्बर 2022 में सुक्खू सरकार आ गयी और 31 मार्च 2023 तक यह सब कुछ घट गया। यह मामला विजिलैन्स जांच में चल रहा है इसलिये जांच रिपोर्ट आने तक इन्तजार करना होगा।
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