Thursday, 16 July 2026
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क्या युवाओं के मुद्दों पर भाजपा को घेरकर 2027 की सियासी पटकथा लिख रही है कांग्रेस?

शिमला/शैल। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव की आहट अब साफ सुनाई देने लगी है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने यूथ कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान की शुरुआत के दौरान जिस तरह NEET पेपर लीक, अग्निवीर योजना, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और शिक्षा सुधार को एक ही मंच से जोड़ा, उससे यह संकेत मिला कि कांग्रेस अब भाजपा के खिलाफ सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार ‘युवाओं का भविष्य’ बनाने की तैयारी में है। यह महज एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के खिलाफ राजनीतिक अभियान का उद्घोष था।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के कार्यकाल में हुए छम्म्ज् पेपर लीक ने लाखों विद्यार्थियों के सपनों को चकनाचूर कर दिया। उनका कहना था कि जब देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो जाएं तो यह केवल परीक्षा प्रणाली की विफलता नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था की जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न है। यह मुद्दा कांग्रेस के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि NEET विवाद ने राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं के बीच असंतोष पैदा किया था और विपक्ष लगातार इसे केंद्र सरकार की प्रशासनिक विफलता के रूप में पेश करता रहा है।
लेकिन मुख्यमंत्री का हमला केवल NEET तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अग्निवीर योजना को हिमाचल के युवाओं के साथ ‘अन्याय’ करार देते हुए कहा कि प्रदेश के हजारों युवाओं का सपना सेना में नियमित भर्ती का होता था, जिसे चार वर्ष की सेवा वाली नई व्यवस्था ने प्रभावित किया है। हिमाचल की सामाजिक और आर्थिक संरचना में सेना का विशेष स्थान रहा है। लगभग हर जिले से बड़ी संख्या में युवा सशस्त्र बलों में भर्ती होते रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस इस मुद्दे को भावनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर भुनाने की कोशिश कर रही है।
दिलचस्प यह भी है कि कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए हिमाचल में पूर्व भाजपा सरकार के दौरान हुए पुलिस भर्ती और अधीनस्थ चयन आयोग के पेपर लीक मामलों को भी याद दिलाया। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार ने राज्य चयन आयोग का गठन कर भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है और नियमित भर्तियों को मेरिट के आधार पर आगे बढ़ाया है। कांग्रेस का प्रयास यह संदेश देने का है कि जहां भाजपा के शासनकाल में भर्ती परीक्षाएं विवादों में रहीं, वहीं वर्तमान सरकार व्यवस्था सुधार का दावा कर रही है। हालांकि भाजपा इन दावों को राजनीतिक प्रचार बताती रही है और कहती है कि रोजगार के मोर्चे पर कांग्रेस अपने चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रही है।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में हिमाचल को देश का नंबर एक राज्य बनाने का लक्ष्य भी दोहराया। उन्होंने कहा कि सरकार आधुनिक सुविधाओं वाले सीबीएसई स्कूल स्थापित कर रही है, शिक्षकों की नियुक्तियां की जा रही हैं और शिक्षा की गुणवत्ता में प्रदेश की रैंकिंग में सुधार हुआ है। यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में स्कूलों के युक्तिकरण, शिक्षकों की कमी और कई सरकारी स्कूलों के विलय या बंद होने को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेरता रहा है। इसलिए शिक्षा के क्षेत्र में किए गए दावे भी आने वाले समय में राजनीतिक बहस का विषय बनने तय हैं।
युवाओं के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य, प्राकृतिक खेती, सामाजिक सुरक्षा और शिक्षा ऋण जैसी योजनाओं का उल्लेख कर यह संदेश देने का प्रयास किया कि राज्य सरकार केवल राजनीतिक आरोप नहीं लगा रही, बल्कि समानांतर रूप से विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर भी काम कर रही है। लेकिन भाषण का सबसे राजनीतिक हिस्सा वह था, जब उन्होंने भाजपा पर पुरानी पेंशन योजना का विरोध करने, राज्य के अधिकारों की अनदेखी करने और 2027 में सत्ता परिवर्तन की बात कही। इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस अब राष्ट्रीय मुद्दों और राज्य सरकार की योजनाओं को जोड़कर संयुक्त चुनावी नैरेटिव तैयार कर रही है।
यूथ कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान की घोषणा भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। संगठन ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में धरना-प्रदर्शन कर छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाने की घोषणा की है। इसका सीधा अर्थ है कि आने वाले दिनों में NEET, बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाएं, अग्निवीर और शिक्षा जैसे विषय प्रदेश की राजनीतिक बहस के केंद्र में रहेंगे। कांग्रेस की कोशिश है कि इन मुद्दों के जरिए वह पहली बार वोट डालने वाले युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों तक सीधी पहुंच बनाए।
दूसरी ओर भाजपा का तर्क अलग है। भाजपा का कहना है कि NEET मामले में जांच एजेंसियों ने कारवाई की, दोषियों की गिरफ्तारी हुई और परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए कदम उठाए गए। अग्निवीर योजना को भाजपा सैन्य सुधार और युवाओं को नए अवसर देने वाली योजना बताती है। प्रदेश भाजपा यह भी आरोप लगाती रही है कि कांग्रेस सरकार रोजगार, आर्थिक प्रबंधन और चुनावी गारंटियों को पूरा करने में असफल रही है और राष्ट्रीय मुद्दों के सहारे अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का प्रयास कर रही है।
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो मुख्यमंत्री का यह कार्यक्रम केवल NEET पेपर लीक के विरोध तक सीमित नहीं था। यह भाजपा के खिलाफ एक व्यापक राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने की शुरुआत थी, जिसमें युवाओं का भविष्य, रोजगार, शिक्षा, सेना में भर्ती, सामाजिक सुरक्षा और केंद्र-राज्य संबंध जैसे कई मुद्दों को एक सूत्र में पिरोया गया। कांग्रेस का लक्ष्य स्पष्ट दिखता है-2027 के चुनाव को केवल राज्य सरकार के प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की नीतियों के मूल्यांकन पर भी केंद्रित करना।
अब यह देखना होगा कि क्या युवाओं के मुद्दों पर कांग्रेस की यह आक्रामक रणनीति चुनावी समर्थन में बदलती हैै। इतना तय है कि हिमाचल की राजनीति में आने वाले दिनों में कांग्रेस सबसे बड़ी लड़ाई सड़कों पर नहीं, बल्कि युवाओं के भरोसे और उनके भविष्य के सवाल पर लड़ेगी।

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