डॉक्टरों के एनपीए, एडहॉक प्रमोशन और जॉब ट्रेनी नियुक्तियों पर उठे सवाल
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Created on Wednesday, 16 September 2026 07:15
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Written by Shail Samachar
शिमला/शैल। हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों के ट्रांसफर और प्रमोशन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों के ट्रांसफर और प्रमोशन के लगातार आदेश जारी हो रहे हैं। लेकिन प्रमोशन के बाद वित्तीय लाभ को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से डॉक्टरों में असमंजस बना हुआ है। उनका कहना है कि सरकार को यह साफ करना चाहिए कि प्रमोशन किस तारीख से प्रभावी होगी और उससे जुड़े आर्थिक लाभ कब से मिलेंगे। मेडिकल कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर के पद पर की जा रही प्रमोशन को लेकर डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें प्रमोशन देकर नई जिम्मेदारी तो दी जा रही है, लेकिन व्यवस्था अभी भी एडहॉक आधार पर चल रही है। उनकी मांग है कि सहायक प्रोफेसर के पद पर प्रमोशन को नियमित किया जाए और प्रमोशन की तारीख से ही उससे जुड़े सभी वित्तीय लाभ दिये जायें।
प्रमोशन और वित्तीय लाभ को लेकर कर्मचारियों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि सरकार समय रहते नीति स्पष्ट कर दे तो ऐसे विवाद अदालत तक जाने से रोके जा सकते हैं।
डॉक्टरों की नाराजगी केवल प्रमोशन तक सीमित नहीं है। एनपीए बंद होने का मुद्दा भी लगातार उठ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि देश के कई राज्यों में सरकारी डॉक्टरों को नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस दिया जा रहा है, जबकि हिमाचल में इसे बंद रखा गया है। सरकारी डॉक्टर निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकते, ऐसे में एनपीए उनके लिए महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ है। डॉक्टरों का कहना है कि एनपीए बंद होने से उनको आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार को इस पर स्पष्ट फैसला लेना चाहिए।
डॉक्टरों की जॉब ट्रेनी के नाम पर की जा रही नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मेडिकल की पढ़ाई और प्रशिक्षण में कई साल लगते हैं। इसके बाद डॉक्टरों को नियमित सेवा देने के बजाये जॉब ट्रेनी के नाम पर नियुक्त करना उनके पेशे के साथ उचित नहीं है।
हालांकि हिमाचल सरकार ने अगस्त माह में जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसर ;स्पेशलिस्टद्ध का मासिक वेतन 33,660 से बढ़ाकर 60 हजार रुपये कर दिया है। पीजी डॉक्टरों, सीनियर रेजिडेंट और सुपर स्पेशलिस्ट के स्टाइपेंड में भी बढ़ोतरी की है। फिर भी डॉक्टरों का तर्क है कि स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विभाग में डॉक्टरों को स्पष्ट सेवा शर्तों और नौकरी की सुरक्षा के साथ नियुक्त किया जाना चाहिए। ट्रेनी के नाम पर लंबे समय तक अस्थायी व्यवस्था रखना डॉक्टरों के मनोबल पर असर डाल सकता है।
स्वास्थ्य विभाग पहले ही डॉक्टरों की कमी और दूरदराज के अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराने की चुनौती से जूझ रहा है। ऐसे में डॉक्टरों के बीच प्रमोशन, वेतन लाभ, एनपीए और नियुक्ति व्यवस्था को लेकर बढ़ता असंतोष सरकार के लिए चिंता का विषय है।
सरकार को अब इन सभी मामलों पर स्पष्ट नीति बनानी होगी। प्रमोशन सिर्फ कागज पर नहीं होनी चाहिए। उसके साथ पद के अनुसार वित्तीय लाभ भी मिलना चाहिए। एनपीए पर फैसला होना चाहिए और जॉब ट्रेनी के नाम पर नियुक्तियों की व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। अगर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना है तो डॉक्टरों का मनोबल भी मजबूत करना होगा।