सुधीर शर्मा और जनक राज पर विजिलेंस की कारवाई से गरमाई हिमाचल की सियासत

Created on Tuesday, 25 August 2026 05:07
Written by Shail Samachar
शिमला/शैल। हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होते ही कांग्रेस सरकार और भाजपा के बीच टकराव का एक नया मोर्चा खुल गया है। एक ओर धर्मशाला से भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले में विजिलेंस जांच का सामना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भरमौर से भाजपा विधायक डॉ. जनक राज भी हिमकेयर योजना में कथित अनियमितताओं की जांच के दायरे में हैं। दोनों मामलों में भाजपा राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगा रही है, जबकि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का कहना है कि सरकार बदले की भावना से नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग के खिलाफ कारवाई कर रही है।
सुधीर शर्मा से शुक्रवार को राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के शिमला मुख्यालय में करीब दो घंटे पूछताछ की गई। उनके साथ विपिन सिंह परमार, सतपाल सिंह सत्ती, बलबीर वर्मा, डॉ. जनक राज, इंद्रदत्त लखनपाल, राकेश जम्वाल और त्रिलोक जम्वाल समेत कई भाजपा विधायक भी विजिलेंस मुख्यालय पहुंचे।
सुधीर शर्मा का कहना है कि वह जांच से नहीं डरते और विजिलेंस द्वारा मांगे जा रहे बैंक खातों, डीमैट खातों, निवेश, संपत्तियों, वाहनों, ऋण और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड दस्तावेजों के साथ उपलब्ध करा रहे हैं। उनका दावा है कि न कोई संपत्ति छिपाई गई है और न कोई वित्तीय लेन-देन। उन्होंने बैजनाथ की पैतृक भूमि के दो हिस्सों की कुल 74.07 लाख रूपये की पंजीकृत बिक्री और बीड़ निवासी अनुराग शर्मा को 14.50 लाख रूपये में हुई एक अन्य संपत्ति बिक्री का भी उल्लेख किया है।
लेकिन सुधीर शर्मा का सवाल जांच से ज्यादा जांच के समय को लेकर है। उनका कहना है कि मामला धर्मशाला से संबंधित है और दस्तावेज भी वहीं उपलब्ध हैं, फिर उन्हें विधानसभा सत्र के बीच शिमला मुख्यालय क्यों बुलाया गया।
यहीं से मामला राजनीतिक रूप से अधिक संवेदनशील हो जाता है। मानसून सत्र 21 अगस्त से शुरू होकर 3 सितंबर तक चलेगा और इस दौरान भाजपा सरकार को आर्थिक स्थिति, रोजगार, विकास, भ्रष्टाचार तथा कानून-व्यवस्था सहित कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है। ऐसे में विपक्ष के दो विधायकों का अलग-अलग मामलों में विजिलेंस जांच के दायरे में आना भाजपा को सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने का अवसर भी देता है।
डॉ. जनक राज की विजिलेंस पूछताछ ने भी राजनीतिक तापमान बढ़ाया है। 20 अगस्त को डॉ. जनक राज से विजिलेंस कार्यालय में करीब चार घंटे पूछताछ हुई। मामला हिमकेयर योजना में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है और पूछताछ मुख्य रूप से उस अवधि से संबंधित बताई गई है जब डॉ.जनक राज आईजीएमसी शिमला में मेडिकल सुपरिंटेंडेंट थे।
रिपोर्टों के अनुसार, विजिलेंस ने उनके कार्यकाल के दौरान हिमकेयर के तहत हुए भुगतान, आय-व्यय तथा प्रशासनिक और वित्तीय फैसलों से संबंधित जानकारी मांगी। डॉ. जनक राज ने बताया कि उनके कार्यकाल में हिमकेयर के तहत करीब 95 करोड़ रूपये के बिल पास हुए और उनके कार्यकाल में कोई अनियमितता नहीं हुई। उन्होंने जांच में की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच सिटिंग जज से कराने की मांग की।
राजनीतिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि विधानसभा सत्र के ठीक पहले दो भाजपा विधायकों से जुड़ी जांचें चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। इससे भाजपा को यह कहने का आधार मिल गया है कि सरकार विपक्षी नेताओं को जांच में उलझाकर सदन के मुद्दों से ध्यान हटाना चाहती है।
सुधीर शर्मा के साथ विजिलेंस मुख्यालय पहुंचे भाजपा विधायकों की संख्या बताती है कि पार्टी इस कारवाई को व्यक्तिगत मामला मानकर नहीं चल रही। भाजपा इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मुद्दा बनाकर सरकार को घेरेगी।
सुधीर शर्मा और जनक राज के मामले अब केवल जांच एजेंसियों की फाइलों तक सीमित नहीं रहे हैं, वे हिमाचल की सत्ता और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा बन चुके हैं। आने वाले दिनों में जांच से निकलने वाले तथ्य ही तय करेंगे कि यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहता है या सरकार और विपक्ष के बीच टकराव को और गहरा करता है।