35 दिन चली हिमाचल विधानसभा, 70 फीसदी से अधिक बजट बिना चर्चा के पास

Created on Wednesday, 10 June 2026 13:02
Written by Shail Samachar

शिमला/शैल। हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने वर्ष 2025 में कुल 35 दिन बैठक की। यह संख्या विधानसभा नियमों में तय न्यूनतम बैठक दिनों के बराबर है। यह जानकारी पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च की वार्षिक रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल विधानसभा ने इस दौरान 21 विधेयक ;बिलद्ध पारित किए, लेकिन इनमें से आधे से ज्यादा बिल एक ही दिन में मंजूर हो गये और बजट का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बिना चर्चा के पारित कर दिया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में देश की सभी राज्य विधानसभाओं का औसत बैठक समय 24 दिन रहा, जबकि हिमाचल विधानसभा 35 दिन चली। ओडिशा विधानसभा सबसे ज्यादा 43 दिन और नागालैंड विधानसभा सबसे कम सात दिन चली। हिमाचल विधानसभा की एक बैठक औसतन पांच घंटे तक चली।
हिमाचल विधानसभा ने वर्ष 2025 में 21 बिल पास किये। इनमें से करीब 57 प्रतिशत बिल ऐसे थे जिन्हें सदन में पेश करने के एक दिन के भीतर ही मंजूरी मिल गई। केवल चार प्रतिशत बिलों को ही विस्तार से जांच और चर्चा के लिए विधानसभा समितियों के पास भेजा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि समितियों में बिलों की गहराई से समीक्षा होती है, इसलिए अधिक बिलों को समिति के पास भेजना कानूनों को बेहतर बनाने में मदद करता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हिमाचल प्रदेश और झारखंड में करीब आधे बिलों को राज्यपाल की मंजूरी मिलने में तीन महीने से अधिक समय लगा। यानी विधानसभा से पास होने के बाद भी कई कानूनों को लागू होने में काफी समय लगा।
वर्ष 2025 में हिमाचल प्रदेश ने कई महत्वपूर्ण कानून बनाये। इनमें संगठित अपराध पर नियंत्राण के लिए नया कानून शामिल है। इस कानून में गंभीर अपराधों के लिए कड़ी सजा, यहां तक कि आजीवन कारावास का भी प्रावधान किया गया है। राज्य ने सार्वजनिक संपत्तियों और सुविधाओं जैसे सड़क, रास्ते और नहरों को नुकसान पहुंचाने या उनमें अवैध बदलाव रोकने के लिए भी कानून बनाया।
इसके अलावा पंचायत राज अधिनियम में संशोधन कर पंचायतों के अधिकार बढ़ाए गए और ग्राम सभा से जुड़े नियमों में बदलाव किए गए। सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए भी नया कानून बनाया गया। राज्य सरकार ने नशे की समस्या से निपटने और नशे के शिकार लोगों के पुनर्वास के लिए भी कानून पारित किया।
महिलाओं को रोजगार के अधिक अवसर देने के लिए हिमाचल प्रदेश ने दुकानदार एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान कानून में संशोधन किया। इसके तहत महिलाओं को रात्रिकालीन शिफ्रट में काम करने की अनुमति दी गई और ओवरटाइम की सीमा भी बढ़ाई गई। ऐसे बदलाव करने वाले राज्यों में हिमाचल प्रदेश भी शामिल रहा।
बजट पर चर्चा के मामले में रिपोर्ट ने कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखे हैं। राज्यों ने औसतन अपने बजट पर आठ दिन चर्चा की, जबकि हिमाचल प्रदेश में बजट पर सात दिन चर्चा हुई। हालांकि इसके बावजूद राज्य का 70 प्रतिशत से अधिक बजट बिना किसी चर्चा के पारित हो गया। इस मामले में हिमाचल प्रदेश, असम और झारखंड उन राज्यों में शामिल रहे जहां बजट का बड़ा हिस्सा बिना बहस के मंजूर किया गया। वहीं तमिलनाडु ऐसा राज्य रहा जहां पूरे बजट पर चर्चा की गई।
पीआरएस की रिपोर्ट से साफ है कि हिमाचल विधानसभा ने तय बैठक दिवस पूरे किए और कई महत्वपूर्ण कानून बनाए। लेकिन बड़ी संख्या में बिलों का जल्दी पास होना और बजट के बड़े हिस्से का बिना चर्चा पारित होना इस बात की ओर भी संकेत करता है कि विधानसभा में महत्वपूर्ण मुद्दों पर और अधिक विस्तृत चर्चा की गुंजाइश बनी हुई है।